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15 साल से निर्मल ग्राम पंचायत, फिर भी पीने के पानी को तरस रहे ग्रामीण

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Lokjeewan Daily

09 अक्टूबर 2026, 02:01 PM 3 मिनट में पढ़ें

15 साल से निर्मल ग्राम पंचायत, फिर भी पीने के पानी को तरस रहे ग्रामीण

- एमडी पंचायत में पानी का संकट
- युवा सरपंच चुनने का लिया संकल्प
राजसमंद लोकजीवन। पंचायती राज चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही गांवों में सरपंच पद के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। कई दावेदार गांवों के विकास के दावे कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जानने के लिए लोकजीवन न्यूज की टीम गुरुवार को निर्मल ग्राम पंचायत एमडी पहुंची। यहां ग्रामीणों ने पेयजल संकट सहित कई समस्याओं से रूबरू कराया।  ग्रामीणों के अनुसार, एमडी पंचायत को पिछले 15 वर्षों से निर्मल ग्राम पंचायत का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को आज भी पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में बागेरी परियोजना से पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन यह पानी पांच दिन में एक बार ही मिल पाता है। ऐसे में ग्रामीणों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कुओं और बावडय़िों पर निर्भर रहना पड़ता है।   ग्रामीणों का कहना है कि यदि राजसमंद झील से पंचायत में पेयजल उपलब्ध कराया जाए, तो पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। ग्रामीणों ने आने वाले सरपंच चुनाव में ऐसे युवा और सक्रिय जनप्रतिनिधि को चुनने की बात कही, जो गांव की समस्याओं को प्राथमिकता से समझे और सबसे पहले पेयजल संकट का समाधान करवाए। गांव के युवाओं ने बताया कि सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाती। इससे पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी होती है। युवाओं ने मांग की कि सरकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं। ग्रामीणों ने गांव के समीप स्थित निजी टायर कंपनी में स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलने की बात भी उठाई। युवाओं का आरोप है कि कंपनी में स्थानीय लोगों के बजाय बाहरी लोगों को रोजगार के अवसर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आगामी सरपंच चुनाव में उम्मीदवारों के सामने स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने का मुद्दा भी रखा जाएगा। एमडी पंचायत में पेयजल संकट, सरकारी योजनाओं की जानकारी और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार वे ऐसे सरपंच का चुनाव करना चाहते हैं, जो केवल आश्वासन देने के बजाय गांव की मूलभूत समस्याओं का समाधान करवाए। अब देखना होगा कि चुनावी मैदान में उतरने वाले दावेदार ग्रामीणों की इन मांगों को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

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